Mon Opusएक काव्य-संग्रह
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रद्धों

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हे राधा तू देख रही, तेरे लाल ने क्या कर दिखलाया, शौर्य, धैर्य और नैतिक नींव पर, यह कुटुंब है बनाया, हे राधा तू देख रही, अनय इस जन का तेरे जन्मे पर, हो जग निर्मम लाख सही, हे भैरवी तू रक्षा कर, हे राधा तू देख रही, तेरी ममता का यह रूप, रहा यह कुल मेरा मीत शाश्वत, सर्वत्र, निरंतर, सुंदर, अनूप। हे राधा तू देख रही, आशा के मेघ को आते, रुचिर है अब जीवन पावन, स्नेह और सहर्ष संदेश पहुंचाते।

— h.v.r.c

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