जो भारतवर्ष की परंपरा में रहा
वह राम है,
श्रुति और स्मृति की परंपरा से बड़ा
वह राम है,
पिता के वचन को करें जो पूरा
वह राम है,
भ्रातप्रेम और पितृभक्ति से जो भरा
वह राम है,
नारी प्रतिष्ठा के लिए जो लड़ा
वह राम है,
प्रेम हेतु अन्याय के समक्ष जो खड़ा
वह राम है,
उच्च नीच की भावना से जो परे
वह राम है,
पापियों से दुर्बल की रक्षा करें
वह राम है,
त्याग और विनम्रता की जो मूरत
वह राम है,
करुणा और उदारता की जो सूरत
वह राम है,
वह नैतिक जो अहंकार से विजयित
वह राम है,
सत्यनिष्ठा के बल पर अपराजित
वह राम है,
तुम्हें और मुझे जिस शिखर पर जाना
वह राम है,
तुमने और मैंने जिसे प्रभु माना
वह राम है।