Mon Opusएक काव्य-संग्रह
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तुम लिखना

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मेरी अभिव्यक्ति से नहीं तुम अनजान, पर इस प्यार का करते गुणगान तुम लिखना, यह जो है तेरे मेरे दरमियां, इस अद्भुत रिश्ते को करते बयान तुम लिखना, रात भर की बात, परस्पर संवाद, वह सारे अनकहे जज्बात तुम लिखना, मुझसे हो कोई शिकायत या दिल में छिपी हो कोई बात तुम लिखना, किसी बात से हो परेशन, यह नासूर हो गया हो निशान तुम लिखना, कैसा रहा तन्हा सफर ले गया जीवन किस डगर तुम लिखना, जीवन पर्यंत रहकर मेरे संग, यह प्रेम प्रसंग तुम लिखना, कोई पूछे अगर तुमसे प्यार का सर्वनाम, मेरा नाम तुम लिखना।

— h.v.r.c

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