Mon Opusएक काव्य-संग्रह
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कल लिखूंगा

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सोच रहा हूं कल लिखूंगा, ऐसा कुछ मन मुझ से कह गया, जब कलम हाथ में पकड़ी, तो सोचता ही रह गया, आज लिखूं या कल लिखूं, ये सोचने में जो विलंभ हुआ, इस कपटी मन के साथ, मेरा अंतरयुद्ध आरंभ हुआ, मैने माना दुश्वार सही, पर मेरे हित की बात है, उसने कहा आज सोजा, आने वाली और भी रात है, विलास के मोह को अब मैं, अंतरमन में वास करने से रोक न सकूंगा, जो अब मन के मते चल दिया हूं, सोच रहा हूं कल लिखूंगा

— h.v.r.c

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