वो आवेश मेँ आके ऐसा कुछ कह गए,
हम धरे के धरे रह गए,
क्या सोचे क्या बोले,
मनो शब्द ज़बान से परे रह गए।
मन मेँ अँधेरा सा छा गया था,
दिल की धड़कने मानो थम सी गयी थी,
अब इससे पहले की अपने होने का ग़म हो,
हे आंजनेय ये बुरा वक़्त ख़तम हो।
गए जब शब्दों के बांड दिल के आर पार,
सोच मेँ पड़ा ये दिल क्या यही था वो यार,
उनके शब्दों के चयन मेँ मुझे अचंभित कर दिए,
हम ने उस छड़ ही अपना प्यार विसर्जित कर दिया।
हृदयहीन, अहंकारी, असंवेदनशील हो चुके है,
उनको पाने की राह मेँ ना जाने क्या क्या खो चुके है,
अब सिर्फ खुदको खोना बचा है,
उनको तो हम बहुत पहले ही खो चुके है।