मुझे तुम एक लम्हा दो,
हो सके तो तन्हा दो,
ले लो सारे विचार मेरे,
और जीने का अर्थ समझा दो,
मुझसे तुम कुछ सवाल करो,
कुछ मुझको तुम बतला दो,
पर रोऊँ जब मैं समक्ष तुम्हारे,
मेरे दुखों को कंधा दो,
मन मेरा अशांत सागर-सा,
इस सागर को सुलझा दो,
नैन तुम्हारे अधिक चमकीले,
इन नैनों में उलझा दो,
ग़ज़ल मेरी है अधूरी,
इस ग़ज़ल को मतला दो,
मुझे तुम एक लम्हा दो,
हो सके तो तन्हा दो।।