खाली रोटी नाम की,
पेट जो भर न पाए,
प्रेम न हमको दीजिए,
प्रेम से सुख न आए।
मां को देखा सांझ में,
सुबह को ढूंढ न पाए,
प्रेम न हमको दीजिए,
प्रेम से सुख न आए।
चल रहा हूं भीड़ में,
कोई मुझको देख न पाए,
प्रेम न हमको दीजिए,
प्रेम से सुख न आए।
झूठी बोली प्रेम की,
मिथ्या समझ न पाए,
प्रेम न हमको दीजिए,
प्रेम से सुख न आए।