Mon Opusएक काव्य-संग्रह
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प्रेम से सुख न आए

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खाली रोटी नाम की, पेट जो भर न पाए, प्रेम न हमको दीजिए, प्रेम से सुख न आए। मां को देखा सांझ में, सुबह को ढूंढ न पाए, प्रेम न हमको दीजिए, प्रेम से सुख न आए। चल रहा हूं भीड़ में, कोई मुझको देख न पाए, प्रेम न हमको दीजिए, प्रेम से सुख न आए। झूठी बोली प्रेम की, मिथ्या समझ न पाए, प्रेम न हमको दीजिए, प्रेम से सुख न आए।

— h.v.r.c

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